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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  6.27.43-44 
एष चैषामधिपतिर्मध्ये तिष्ठति वीर्यवान्॥ ४३॥
जयार्थी नित्यमादित्यमुपतिष्ठति वीर्यवान्।
नाम्ना पृथिव्यां विख्यातो राजन् शतबलीति य:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
'देखो, उनके बीच में उनका महाबली सेनापति खड़ा है। वह अत्यन्त बलवान है और विजय प्राप्ति के लिए सदैव सूर्यदेव की आराधना करता है। हे राजन! यह वीर पुरुष इस लोक में शतबालिका नाम से विख्यात है।' 43-44
 
‘Look, their mighty commander is standing in their midst. He is very strong and always worships the Sun God to achieve victory. O King! This brave man is famous in this world by the name of Shatabalika. 43-44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)