श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय  »  श्लोक 32-34h
 
 
श्लोक  6.27.32-34h 
एतेऽसितमुखा घोरा गोलाङ्गूला महाबला:॥ ३२॥
शतं शतसहस्राणि दृष्ट्वा वै सेतुबन्धनम्।
गोलाङ्गूलं महाराज गवाक्षं नाम यूथपम्॥ ३३॥
परिवार्याभिनर्दन्ते लङ्कां मर्दितुमोजसा।
 
 
अनुवाद
ये लंगूर कुल के काले मुँह वाले वानर हैं। ये बहुत बलवान हैं। इन भयंकर वानरों की संख्या एक करोड़ है। महाराज! ये वानर लंगूर कुल के सरदार गवाक्ष को, जिसने सेतु निर्माण में सहायता की थी, घेरकर लंका को बलपूर्वक कुचलने के लिए जोर-जोर से दहाड़ रहे हैं।
 
‘These are black faced monkeys of the langur clan. They are very strong. The number of these fierce monkeys is one crore. Maharaj! These monkeys are surrounding the leader of the langur clan named Gavaksha who had helped in building the bridge and are roaring loudly to crush Lanka with force. 32-33 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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