श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.25.32 
रामलक्ष्मणगुप्ता सा सुग्रीवेण च वाहिनी।
बभूव दुर्धर्षतरा सर्वैरपि सुरासुरै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! श्री राम, लक्ष्मण और सुग्रीव द्वारा रक्षित वह वानर सेना समस्त देवताओं और दानवों के लिए भी पराजित करना अत्यन्त कठिन है।
 
Maharaj! That army of monkeys protected by Shri Ram, Lakshman and Sugreeva is extremely difficult to defeat even for all the gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)