श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.25.24 
श्व: काल्ये नगरीं लङ्कां सप्राकारां सतोरणाम्।
रक्षसां च बलं पश्य शरैर्विध्वंसितं मया॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कल प्रातःकाल तुम मेरे बाणों से लंकापुरी का, उसके प्राचीर, द्वारों तथा राक्षस सेना सहित विनाश देखोगे।
 
Tomorrow morning you will see the destruction of Lankapuri, including its ramparts and gates, and the demon army, by my arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)