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ramayan 6.25.17: उन दोनों के वे वचन सुनकर समस्त प्राणियों के कल्याण में लगे हुए दशरथनन्दन भगवान श्री रामजी हँसकर बोले-॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.25.17 
तयोस्तद् वचनं श्रुत्वा रामो दशरथात्मज:।
अब्रवीत् प्रहसन् वाक्यं सर्वभूतहिते रत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों के वे वचन सुनकर समस्त प्राणियों के कल्याण में लगे हुए दशरथनन्दन भगवान श्री रामजी हँसकर बोले-॥17॥
 
Hearing those words of both of them, Dashrathanandan Lord Shri Ram, who is engaged in the welfare of all living beings, said laughingly -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)