श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.25.12 
निविष्टं निविशच्चैव भीमनादं महाबलम्।
तद‍्बलार्णवमक्षोभ्यं ददृशाते निशाचरौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भयंकर शोर मचाती वह विशाल सेना कुछ स्थानों पर तो डेरा डाल चुकी थी और कुछ स्थानों पर डालती जा रही थी। दोनों रात्रि-भ्रमण करने वालों ने देखा कि वानरों की वह सेना समुद्र के समान अभेद्य थी।
 
That huge army making a terrible noise had already set up camp in some places and was continuing to do so in others. The two night-walkers saw that the army of monkeys was as impenetrable as the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)