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दीर्घमुष्णं च नि:श्वस्य समुद्वीक्ष्य च लक्ष्मणम्।
उवाच वचनं वीरस्तत्कालहितमात्मन:॥ ८॥
अनुवाद
ऐसा मन में कहकर वीर श्री रामजी ने गहरी, गर्म साँस ली और लक्ष्मण की ओर देखकर समय के अनुसार उनके लिए हितकर वचन बोले-॥8॥
Having said this in his mind, the brave Sri Rama took a deep, hot breath and looking towards Lakshmana spoke words that were beneficial for him according to the time -॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥