श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.24.8 
दीर्घमुष्णं च नि:श्वस्य समुद्वीक्ष्य च लक्ष्मणम्।
उवाच वचनं वीरस्तत्कालहितमात्मन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा मन में कहकर वीर श्री रामजी ने गहरी, गर्म साँस ली और लक्ष्मण की ओर देखकर समय के अनुसार उनके लिए हितकर वचन बोले-॥8॥
 
Having said this in his mind, the brave Sri Rama took a deep, hot breath and looking towards Lakshmana spoke words that were beneficial for him according to the time -॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)