न वासवेनापि सहस्रचक्षुषा
युद्धेऽस्मि शक्यो वरुणेन वा स्वयम्।
यमेन वा धर्षयितुं शराग्निना
महाहवे वैश्रवणेन वा पुन:॥ ४४॥
अनुवाद
यदि महासमर में सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र या वरुणदेव अथवा स्वयं यमराज अथवा मेरे बड़े भाई कुबेर भी आ जाएँ, तो भी वे अपने बाणों की अग्नि से मुझे पराजित नहीं कर सकते॥44॥
If in the great battle the thousand-eyed Indra or Varun in person or Yamraj himself or my elder brother Kuber come, then even they cannot defeat me with the fire of their arrows. 44॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुर्विंश: सर्ग: ॥ २ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आ र्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥