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ramayan 6.24.27: महाराज! समुद्र के उत्तरी तट पर पहुँचकर मैंने आपका सन्देश बहुत ही स्पष्ट शब्दों में तथा मधुर सान्त्वनापूर्ण शब्दों में कह सुनाया॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 6.24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.24.27 
सागरस्योत्तरे तीरेऽब्रुवं ते वचनं तथा।
यथा संदेशमक्लिष्टं सान्त्वयन् श्लक्ष्णया गिरा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! समुद्र के उत्तरी तट पर पहुँचकर मैंने आपका सन्देश बहुत ही स्पष्ट शब्दों में तथा मधुर सान्त्वनापूर्ण शब्दों में कह सुनाया॥ 27॥
 
Maharaj! After reaching the northern shore of the sea, I conveyed your message in very clear words and sweet consoling words.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)