vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना
»
श्लोक 27
श्लोक
6.24.27
सागरस्योत्तरे तीरेऽब्रुवं ते वचनं तथा।
यथा संदेशमक्लिष्टं सान्त्वयन् श्लक्ष्णया गिरा॥ २७॥
अनुवाद
महाराज! समुद्र के उत्तरी तट पर पहुँचकर मैंने आपका सन्देश बहुत ही स्पष्ट शब्दों में तथा मधुर सान्त्वनापूर्ण शब्दों में कह सुनाया॥ 27॥
Maharaj! After reaching the northern shore of the sea, I conveyed your message in very clear words and sweet consoling words.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×