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ramayan 6.24.12: देखो, यह शीतल और सुहावनी वायु इन वनों को बार-बार झंकृत कर रही है, जिनमें मतवाले पक्षी कलरव कर रहे हैं, भौंरे पत्तों और फूलों में मग्न हैं और जिनका प्रत्येक भाग कोयलों ​​के कोरस और संगीत से भरा हुआ है।'   |   ramayan सर्ग 6.24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.24.12 
पश्य मत्तविहंगानि प्रलीनभ्रमराणि च।
कोकिलाकुलखण्डानि दोधवीति शिवोऽनिल:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
देखो, यह शीतल और सुहावनी वायु इन वनों को बार-बार झंकृत कर रही है, जिनमें मतवाले पक्षी कलरव कर रहे हैं, भौंरे पत्तों और फूलों में मग्न हैं और जिनका प्रत्येक भाग कोयलों ​​के कोरस और संगीत से भरा हुआ है।'
 
Behold, this cool and pleasant breeze is repeatedly vibrating these forests in which the drunken birds are chirping, the bumblebees are engrossed in the leaves and flowers and each section of which is filled with the chorus and music of cuckoos.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)