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ramayan 6.23.4: धूल से भरी हुई तेज हवा चल रही है। पृथ्वी काँप रही है। पर्वतों के शिखर हिल रहे हैं और वृक्ष गिर रहे हैं।॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.23: श्रीराम का लक्ष्मण से उत्पातसूचक लक्षणों का वर्णन और लङ्का पर आक्रमण   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.23.4 
वाताश्च कलुषा वान्ति कम्पते च वसुंधरा।
पर्वताग्राणि वेपन्ते पतन्ति च महीरुहा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धूल से भरी हुई तेज हवा चल रही है। पृथ्वी काँप रही है। पर्वतों के शिखर हिल रहे हैं और वृक्ष गिर रहे हैं।॥4॥
 
‘A strong wind filled with dust is blowing. The earth is shaking. The peaks of the mountains are shaking and trees are falling.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)