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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  6.22.89 
जयस्व शत्रून् नरदेव मेदिनीं
ससागरां पालय शाश्वती: समा:।
इतीव रामं नरदेवसत्कृतं
शुभैर्वचोभिर्विविधैरपूजयन्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने कहा - ‘नरदेव! आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करें और समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी की सदैव रक्षा करें।’ इस प्रकार उसने राजा द्वारा सम्मानित श्री रामजी को अनेक शुभ वचनों से नमस्कार किया॥89॥
 
Then he said – 'Naradev! May you be victorious over your enemies and always protect the whole earth till the sea.' In this way he greeted Shri Ram, who was honored by the king, with various auspicious words. 89॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्वाविंश: सर्ग: ॥ २ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें बाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ २॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)