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ramayan 6.22.74: मैकालय समुद्र में नल द्वारा बनाया गया वह सुन्दर एवं मनोहर सेतु आकाश में स्वातिपथ (छाया पथ) के समान शोभायमान हो रहा था। ॥7 4॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.22.74 
स नलेन कृत: सेतु: सागरे मकरालये।
शुशुभे सुभग: श्रीमान् स्वातीपथ इवाम्बरे॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
मैकालय समुद्र में नल द्वारा बनाया गया वह सुन्दर एवं मनोहर सेतु आकाश में स्वातिपथ (छाया पथ) के समान शोभायमान हो रहा था। ॥7 4॥
 
That beautiful and graceful bridge built by Nal in the Makalaya sea looked as beautiful as the Swatipath (shadow path) in the sky. ॥ 7 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)