श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.22.70 
अह्ना तृतीयेन तथा योजनानि तु सागरे।
त्वरमाणैर्महाकायैरेकविंशतिरेव च॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तीसरे दिन विशाल वानरों ने तेजी से काम करते हुए समुद्र में इक्कीस योजन लम्बा पुल बना दिया।
 
On the third day the huge apes, working swiftly, built a bridge twenty-one yojanas long in the sea.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)