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श्लोक  6.22.67 
शिलानां क्षिप्यमाणानां शैलानां तत्र पात्यताम्।
बभूव तुमुल: शब्दस्तदा तस्मिन् महोदधौ॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उस समय समुद्र में पत्थर फेंके जाने और पर्वतों के गिराए जाने से बहुत भयंकर ध्वनि उत्पन्न हो रही थी।
 
At that time a very dreadful noise was being produced by the rocks being thrown into the ocean and the mountains being brought down. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)