vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना
»
श्लोक 48
श्लोक
6.22.48
अहं सेतुं करिष्यामि विस्तीर्णे मकरालये।
पितु: सामर्थ्यमासाद्य तत्त्वमाह महोदधि:॥ ४८॥
अनुवाद
'प्रभु! मैं अपने पिता की दी हुई शक्ति से इस विशाल सागर पर पुल बनाऊँगा। सागर ने सत्य कहा है।' 48.
‘Lord! With the power given by my father, I will build a bridge over this vast ocean. The ocean has spoken the truth. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×