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ramayan 6.22.46: यह महाउत्साही वानर अपने पिता के समान ही शिल्पकला में समर्थ है, अतः इसे मेरे ऊपर सेतु बनाना चाहिए। मैं उस सेतु को धारण करूँगा।॥46॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.22.46 
एष सेतुं महोत्साह: करोतु मयि वानर:।
तमहं धारयिष्यामि यथा ह्येष पिता तथा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
यह महाउत्साही वानर अपने पिता के समान ही शिल्पकला में समर्थ है, अतः इसे मेरे ऊपर सेतु बनाना चाहिए। मैं उस सेतु को धारण करूँगा।॥46॥
 
This great enthusiastic monkey is as capable of craftsmanship as his father, so he should build a bridge over me. I will wear that bridge.'॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)