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ramayan 6.22.43: इस प्रकार भगवान् रामजी की कृपा से वह मरुभूमि ऐसे अनेक गुणों से युक्त होकर सबके लिए मंगलमय पथ बन गई ॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.22.43 
एवमेतैश्च संयुक्तो बहुभि: संयुतो मरु:।
रामस्य वरदानाच्च शिव: पन्था बभूव ह॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान् रामजी की कृपा से वह मरुभूमि ऐसे अनेक गुणों से युक्त होकर सबके लिए मंगलमय पथ बन गई ॥ 43॥
 
Thus, by the blessings of Lord Rama, that desert became an auspicious path for everyone, being endowed with numerous such virtues. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)