श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.22.39 
अवदारणशब्दश्च दारुण: समपद्यत।
तस्मात् तद् बाणपातेन अप: कुक्षिष्वशोषयत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उस समय पृथ्वी के फटने की भयंकर ध्वनि हुई। उस बाण को चलाकर भगवान राम ने पृथ्वी के सभी तालाबों और सरोवरों का जल सुखा दिया।
 
At that time a terrible sound of the earth being torn apart was heard. By shooting that arrow Lord Rama dried up the water present in the ponds and lakes of the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)