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ramayan 6.22.38: वह गड्ढा कुएँ के समान हो गया और व्रण नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस कुएँ से सदैव निकलने वाला जल समुद्र के जल के समान प्रतीत होता है। 38.   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.22.38 
स बभूव तदा कूपो व्रण इत्येव विश्रुत:।
सततं चोत्थितं तोयं समुद्रस्येव दृश्यते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वह गड्ढा कुएँ के समान हो गया और व्रण नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस कुएँ से सदैव निकलने वाला जल समुद्र के जल के समान प्रतीत होता है। 38.
 
That hole became like a well and came to be known as Vrana. The water that always flows out of that well looks like the water of the ocean. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)