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ramayan 6.22.37: उस बाण से आहत होकर पृथ्वी पीड़ा से कराहने लगी। रसातल का जल उस बाण द्वारा बनाए गए छिद्र से ऊपर उछलने लगा।   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.22.37 
ननाद च तदा तत्र वसुधा शल्यपीडिता।
तस्माद् व्रणमुखात् तोयमुत्पपात रसातलात्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस बाण से आहत होकर पृथ्वी पीड़ा से कराहने लगी। रसातल का जल उस बाण द्वारा बनाए गए छिद्र से ऊपर उछलने लगा।
 
Being hurt by that arrow, the earth started crying in pain. The water of the abyss started jumping up through the hole created by that arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)