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ramayan 6.22.34: "मैं उन पापियों के द्वारा बार-बार स्पर्शित होता रहता हूँ, मैं इस पाप को सहन नहीं कर सकता। श्री राम! आप अपने इस उत्तम बाण को वहाँ सफल बनाइए।" ॥34॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.22.34 
तैर्न तत्स्पर्शनं पापं सहेयं पापकर्मभि:।
अमोघ: क्रियतां राम अयं तत्र शरोत्तम:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
"मैं उन पापियों के द्वारा बार-बार स्पर्शित होता रहता हूँ, मैं इस पाप को सहन नहीं कर सकता। श्री राम! आप अपने इस उत्तम बाण को वहाँ सफल बनाइए।" ॥34॥
 
"I keep getting touched by those sinners, I cannot tolerate this sin. Shri Ram! You make this excellent arrow of yours successful there." ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)