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ramayan 6.22.30: तब श्री रामचंद्रजी ने उससे कहा- 'वरुणालय! मेरी बात सुनो। मेरा यह विशाल बाण अमोघ है। बताओ, इसे कहाँ छोड़ा जाए'॥30॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.22.30 
तमब्रवीत् तदा राम: शृणु मे वरुणालय।
अमोघोऽयं महाबाण: कस्मिन् देशे निपात्यताम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तब श्री रामचंद्रजी ने उससे कहा- 'वरुणालय! मेरी बात सुनो। मेरा यह विशाल बाण अमोघ है। बताओ, इसे कहाँ छोड़ा जाए'॥30॥
 
Then Shri Ramchandraji said to him- 'Varunalay! Listen to me. This huge arrow of mine is infallible. Tell me, where should it be released'॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)