Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.22.27: मेरा भी यही स्वभाव है कि मैं अथाह और अथाह हूँ - मुझसे परे कोई नहीं जा सकता। यदि मेरी थाह ली जाए, तो यह विकार मेरे स्वभाव का उल्लंघन होगा। इसीलिए मैं तुम्हें इससे परे जाने का यह उपाय बताता हूँ॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.22.27 
तत्स्वभावो ममाप्येष यदगाधोऽहमप्लव:।
विकारस्तु भवेद् गाध एतत् ते प्रवदाम्यहम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मेरा भी यही स्वभाव है कि मैं अथाह और अथाह हूँ - मुझसे परे कोई नहीं जा सकता। यदि मेरी थाह ली जाए, तो यह विकार मेरे स्वभाव का उल्लंघन होगा। इसीलिए मैं तुम्हें इससे परे जाने का यह उपाय बताता हूँ॥ 27॥
 
‘This is my nature too, that I am unfathomable and bottomless – no one can go beyond me. If I am fathomed, then this disorder will be a violation of my nature. That is why I tell you this method to go beyond it.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)