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श्लोक  6.22.21-22h 
धातुभिर्मण्डित: शैलो विविधैर्हिमवानिव।
एकावलीमध्यगतं तरलं पाण्डरप्रभम्॥ २१॥
विपुलेनोरसा बिभ्रत्कौस्तुभस्य सहोदरम्।
 
 
अनुवाद
इसीलिए वे नाना प्रकार की धातुओं से विभूषित हिम पर्वत के समान प्रतीत होते थे। उनके विशाल वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि के समान एक श्वेत कांतिमय मणि थी, जो मोतियों की एक ही माला के मध्य में चमक रही थी।
 
That is why he looked like a snowy mountain adorned with various kinds of metals. On his huge chest he wore a white radiant gem, which was shining in the middle of a single necklace of pearls, similar to the brother of the Kaustubh gem.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)