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ramayan 6.22.17: तब समुद्र ही समुद्र के बीच से मूर्ति के रूप में प्रकट हुआ, मानो मेरु नामक महान शिला की चमत्कारिक गति से सूर्यदेव प्रकट हुए हों॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.22.17 
ततो मध्यात् समुद्रस्य सागर: स्वयमुत्थित:।
उदयाद्रिमहाशैलान्मेरोरिव दिवाकर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब समुद्र ही समुद्र के बीच से मूर्ति के रूप में प्रकट हुआ, मानो मेरु नामक महान शिला की चमत्कारिक गति से सूर्यदेव प्रकट हुए हों॥17॥
 
Then the ocean itself appeared in the form of a statue from the middle of the ocean, as if the Sun God had emerged from the miraculous rising motion of the great rock of Meru. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)