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ramayan 6.22.14-15: वह समुद्र, उसमें रहने वाले जीव, लहरें, सर्प और राक्षसोंसहित सहसा भयंकर वेग से परिपूर्ण हो गया और बिना किसी प्रलयकाल के तीव्र गति से अपनी सीमा को लांघकर एक-एक योजन आगे बढ़ गया॥14-15॥   |   ramayan सर्ग 6.22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.22.14-15 
सह भूतै: सतोयोर्मि: सनाग: सहराक्षस:॥ १४॥
सहसाभूत् ततो वेगाद् भीमवेगो महोदधि:।
योजनं व्यतिचक्राम वेलामन्यत्र सम्प्लवात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह समुद्र, उसमें रहने वाले जीव, लहरें, सर्प और राक्षसोंसहित सहसा भयंकर वेग से परिपूर्ण हो गया और बिना किसी प्रलयकाल के तीव्र गति से अपनी सीमा को लांघकर एक-एक योजन आगे बढ़ गया॥14-15॥
 
The ocean, along with the creatures, waves, serpents and demons living within it, suddenly became full of terrifying velocity and without any period of devastation, crossed its limits at a rapid speed and proceeded ahead by one yojana at a time.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)