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ramayan 6.21.5: सीताहरण से पूर्व सोते समय सीता का सिर उस भुजा की शोभा बढ़ाता था और श्वेत शय्या पर स्थित तथा लाल चंदन से विभूषित वह भुजा गंगाजल में निवास करने वाले तक्षक के शरीर के समान शोभा पाती थी॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.21.5 
शयने चोत्तमाङ्गेन सीताया: शोभितं पुरा।
तक्षकस्येव सम्भोगं गङ्गाजलनिषेवितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सीताहरण से पूर्व सोते समय सीता का सिर उस भुजा की शोभा बढ़ाता था और श्वेत शय्या पर स्थित तथा लाल चंदन से विभूषित वह भुजा गंगाजल में निवास करने वाले तक्षक के शरीर के समान शोभा पाती थी॥5॥
 
Before Sita's abduction, Sita's head used to enhance the beauty of that arm while sleeping and that arm, situated on a white bed and decorated with red sandalwood, used to be beautiful like the body of Takshaka who resides in the waters of Ganga. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)