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ramayan 6.21.4: पहले उस भुजा को चंदन और अगुरु से सींचा जाता था। प्रातःकालीन सूर्य के समान कांति वाला लाल चंदन उसकी शोभा बढ़ाता था। ॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.21.4 
चन्दनागुरुभिश्चैव पुरस्तादभिसेवितम्।
बालसूर्यप्रकाशैश्च चन्दनैरुपशोभितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पहले उस भुजा को चंदन और अगुरु से सींचा जाता था। प्रातःकालीन सूर्य के समान कांति वाला लाल चंदन उसकी शोभा बढ़ाता था। ॥4॥
 
Earlier, that arm was served with sandalwood and aguru. The red sandalwood having the radiance of the morning sun used to enhance its beauty. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)