Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.21.33: तदनन्तर श्री रघुनाथजी क्रोध में दीर्घ निःश्वास लेकर पुनः अपने भयंकर और अतुलनीय धनुष को खींचने लगे। यह देखकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण उछलकर उनके पास पहुँचे और 'बस, बस, अब और नहीं, अब और नहीं' कहकर उन्होंने उनका धनुष पकड़ लिया॥ 33॥ | ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर श्री रघुनाथजी क्रोध में दीर्घ निःश्वास लेकर पुनः अपने भयंकर और अतुलनीय धनुष को खींचने लगे। यह देखकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण उछलकर उनके पास पहुँचे और 'बस, बस, अब और नहीं, अब और नहीं' कहकर उन्होंने उनका धनुष पकड़ लिया॥ 33॥
Thereafter, Shri Raghunathji, taking a deep breath in anger, started pulling his fierce and incomparable bow again. Seeing this, Sumitra's son Lakshman jumped up and reached him and saying, 'Enough, enough, no more, no more', he caught hold of his bow.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥