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ramayan 6.21.30: चमकते हुए फन और तेजोमय नेत्रों वाले सर्प व्याकुल हो गए और पाताल में रहने वाले महाबली राक्षस भी व्याकुल हो गए ॥30॥   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.21.30 
व्यथिता: पन्नगाश्चासन् दीप्तास्या दीप्तलोचना:।
दानवाश्च महावीर्या: पातालतलवासिन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
चमकते हुए फन और तेजोमय नेत्रों वाले सर्प व्याकुल हो गए और पाताल में रहने वाले महाबली राक्षस भी व्याकुल हो गए ॥30॥
 
The serpents with shining hoods and radiant eyes became agitated and the mighty demons living in the netherworld also became restless. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)