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ramayan 6.21.2: उस समय शत्रुघ्न के रक्षक श्री राम ने अपने दाहिने हाथ को तकिया के रूप में उपयोग किया था, जो सांप के शरीर के समान कोमल था और जो वनवास में जाने से पहले हमेशा सुंदर सोने के आभूषणों से सुसज्जित रहता था।   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.21.2 
बाहुं भुजङ्गभोगाभमुपधायारिसूदन:।
जातरूपमयैश्चैव भूषणैर्भूषितं पुरा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय शत्रुघ्न के रक्षक श्री राम ने अपने दाहिने हाथ को तकिया के रूप में उपयोग किया था, जो सांप के शरीर के समान कोमल था और जो वनवास में जाने से पहले हमेशा सुंदर सोने के आभूषणों से सुसज्जित रहता था।
 
At that time, Sri Rama, the protector of Shatrughan, had used as a pillow one of his right arms, which was as soft as a snake's body and which before going into exile was always adorned with beautiful gold ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)