श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.20.5-6 
एतौ सागरमासाद्य संनिविष्टौ महाद्युते॥ ५॥
बलं चाकाशमावृत्य सर्वतो दशयोजनम्।
तत्त्वभूतं महाराज क्षिप्रं वेदितुमर्हसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महातेजस्वी महाराज! ये दोनों रघुवंशी भाई भी इस समय समुद्रतट पर आकर ठहरे हुए हैं। उस वानरों की सेना ने दस योजन के रिक्त स्थान को चारों ओर से घेर लिया है और वहीं ठहरी हुई है। यह बात सर्वथा सत्य है। आप शीघ्र ही इस विषय में विशेष सूचना प्राप्त करें॥ 5-6॥
 
‘Maha-vibrant Maharaj! These two Raghuvanshi brothers have also come and stayed on the sea-shore at this time. That army of monkeys has surrounded an empty space of ten yojanas from all sides and is staying there. This is absolutely correct. You should soon get special information on this matter.॥ 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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