| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना » श्लोक 29-30 |
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| | | | श्लोक 6.20.29-30  | ततोऽब्रवीद् वालिसुतोऽप्यङ्गदो हरिसत्तम:।
नायं दूतो महाराज चारक: प्रतिभाति मे॥ २९॥
तुलितं हि बलं सर्वमनेन तव तिष्ठता।
गृह्यतां मागमल्लङ्कामेतद्धि मम रोचते॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | तब वानरप्रधान बलिकुमार अंगद ने कहा, "महाराज! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यह कोई दूत नहीं, बल्कि कोई गुप्तचर है। यहाँ खड़े-खड़े इसने आपकी सेना की संख्या का मापन और अनुमान लगाया है। अतः इसे पकड़ लेना चाहिए और इसे लंका में जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मुझे यही उचित प्रतीत होता है।" 29-30. | | | | Then the chief of the monkeys, Valikumar Angad, said, "Maharaj! I feel that this is not a messenger but a spy. Standing here, he has measured and estimated the size of your army. Therefore, he should be captured and he should not be allowed to go to Lanka. This seems right to me." 29-30. | | ✨ ai-generated | | |
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