श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.20.28 
महाबलं महात्मानं दुराधर्षं सुरैरपि।
न बुध्यसे रघुश्रेष्ठं यस्ते प्राणान् हरिष्यति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘रघुकुलतिलक श्री राम महाबली हैं, महान आत्मा हैं और देवताओं के लिए भी उन्हें हराना कठिन है, परंतु तुम अभी तक उन्हें समझ नहीं पाए। (तुमने चुपके से सीता का अपहरण किया है, परंतु) वे (सामने आकर) तुम्हारे प्राण हर लेंगे।’॥28॥
 
‘Raghukultilak Shri Ram is a mighty person, a great soul and is difficult to defeat even for the gods, but you have not been able to understand him yet. (You have kidnapped Sita secretly, but) he will (come in front) and take away your life.’॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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