| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 6.20.25  | न मोक्ष्यसे रावण राघवस्य
सुरै: सहेन्द्रैरपि मूढ गुप्त:।
अन्तर्हित: सूर्यपथं गतोऽपि
तथैव पातालमनुप्रविष्ट:।
गिरीशपादाम्बुजसंगतो वा
हतोऽसि रामेण सहानुजस्त्वम्॥ २५॥ | | | | | | अनुवाद | | मूर्ख रावण! यदि इन्द्र आदि सभी देवता भी तुम्हारी रक्षा करें, तो भी तुम श्री रघुनाथजी के हाथों से जीवित नहीं बच सकोगे। तुम अदृश्य हो जाओ, आकाश में चले जाओ, पाताल में प्रवेश कर जाओ या महादेवजी के चरणों की शरण ले लो; तो भी तुम अपने भाइयों सहित श्री रामचन्द्रजी के हाथों अवश्य मारे जाओगे॥25॥ | | | | Fool Ravana! Even if all the gods like Indra protect you, you will not be able to escape alive from the hands of Shri Raghunathji. You become invisible, go into the sky, enter the underworld or take shelter at the feet of Mahadevji; Still, you along with your brothers will definitely be killed by the hands of Shri Ramchandraji. 25॥ | | ✨ ai-generated | | |
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