| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना » श्लोक 23 |
|
| | | | श्लोक 6.20.23  | न मेऽसि मित्रं न तथानुकम्प्यो
न चोपकर्तासि न मे प्रियोऽसि।
अरिश्च रामस्य सहानुबन्ध-
स्ततोऽसि वालीव वधार्ह वध्य:॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | (दूत! तुम रावण से इस प्रकार कहना-) हे रावण! तुम वध के योग्य हो! न तो तुम मेरे मित्र हो, न दया के पात्र हो, न मेरे उपकारक हो, न मेरे प्रिय जनों में से हो। तुम भगवान राम के शत्रु हो, इसलिए तुम्हें अपने बन्धुओं सहित बालि के समान मेरे द्वारा मार डाला जाए॥ 23॥ | | | | (Messenger! You should say to Ravana thus-) O Ravana, you are worthy of being killed! You are neither my friend, nor worthy of mercy, nor are you my benefactor, nor are you one of my favourite people. You are an enemy of Lord Rama, therefore you, along with your relatives, should be killed by me just like Vali.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|