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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  6.20.15-16h 
तत् प्रापयन्तं वचनं तूर्णमाप्लुत्य वानरा:॥ १५॥
प्रापद्यन्त तदा क्षिप्रं लोप्तुं हन्तुं च मुष्टिभि:।
 
 
अनुवाद
जब वह संदेश दे रहा था, बंदर उछलकर उसकी ओर दौड़ पड़े। वे चाहते थे कि हम जल्दी से उसके पंख नोच लें और उसे मुक्कों से मार डालें।
 
While he was giving the message, the monkeys jumped up and rushed to him. They wanted us to quickly pluck out his wings and kill him with our fists.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)