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श्लोक 6.20.14-15h  |
स गत्वा दूरमध्वानमुपर्युपरि सागरम्।
संस्थितो ह्यम्बरे वाक्यं सुग्रीवमिदमब्रवीत्॥ १४॥
सर्वमुक्तं यथाऽऽदिष्टं रावणेन दुरात्मना। |
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| अनुवाद |
| समुद्र के पार बहुत दूर तक यात्रा करके वह सुग्रीव के पास पहुँचा और आकाश में रहकर उसने दुष्टात्मा रावण की आज्ञा के अनुसार उससे वे सब बातें कहीं ॥14 1/2॥ |
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| Travelling a very long distance over the sea, he reached Sugreeva and staying in the sky, he told him all those things as per the orders of the evil souled Ravana. ॥14 1/2॥ |
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