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श्लोक 6.20.12  |
नहीयं हरिभिर्लङ्का प्राप्तुं शक्या कथंचन।
देवैरपि सगन्धर्वै: किं पुनर्नरवानरै:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| हमारी लंका में तो वानर किसी प्रकार भी नहीं पहुँच सकते। देवताओं और गन्धर्वों का भी यहाँ प्रवेश असम्भव है; फिर मनुष्यों और वानरों का क्या होगा?''॥12॥ |
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| The monkeys cannot reach our Lanka in any way. It is impossible for even the gods and Gandharvas to enter here; then what about humans and monkeys?''॥ 12॥ |
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