श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.20.12 
नहीयं हरिभिर्लङ्का प्राप्तुं शक्या कथंचन।
देवैरपि सगन्धर्वै: किं पुनर्नरवानरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हमारी लंका में तो वानर किसी प्रकार भी नहीं पहुँच सकते। देवताओं और गन्धर्वों का भी यहाँ प्रवेश असम्भव है; फिर मनुष्यों और वानरों का क्या होगा?''॥12॥
 
The monkeys cannot reach our Lanka in any way. It is impossible for even the gods and Gandharvas to enter here; then what about humans and monkeys?''॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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