| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 20: शार्दूल के कहने से रावण का शुक को दूत बनाकर सुग्रीव के पास संदेश भेजना, सुग्रीव का रावण के लिये उत्तर देना » श्लोक 1-3h |
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| | | | श्लोक 6.20.1-3h  | ततो निविष्टां ध्वजिनीं सुग्रीवेणाभिपालिताम्।
ददर्श राक्षसोऽभ्येत्य शार्दूलो नाम वीर्यवान्॥ १॥
चारो राक्षसराजस्य रावणस्य दुरात्मन:।
तां दृष्ट्वा सर्वतोऽव्यग्रां प्रतिगम्य स राक्षस:॥ २॥
आविश्य लङ्कां वेगेन राजानमिदमब्रवीत्। | | | | | | अनुवाद | | इतने में ही दुष्टचित्त राक्षसराज रावण का गुप्तचर महाबली दैत्य शार्दूल वहाँ आया और उसने सुग्रीव द्वारा रक्षित, समुद्रतट पर डेरा डाले हुए वानर सेना को देखा। उस विशाल सेना को सर्वत्र शांतिपूर्वक स्थित देखकर वह दैत्य लौटकर शीघ्र ही लंकापुरी में गया और राजा रावण से इस प्रकार बोला -॥1-2 1/2॥ | | | | Meanwhile, the valiant demon Shardul, a spy of the evil-minded demon king Ravana, came there and saw the monkey army camped on the sea-shore, protected by Sugreeva. Seeing that huge army peacefully stationed everywhere, the demon returned and quickly went to Lankapuri and spoke to King Ravana thus -॥ 1-2 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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