vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान
»
श्लोक 3
श्लोक
6.2.3
संतापस्य च ते स्थानं नहि पश्यामि राघव।
प्रवृत्तावुपलब्धायां ज्ञाते च निलये रिपो:॥ ३॥
अनुवाद
रघुनन्दन! अब जब आपको सीता का समाचार और शत्रु का स्थान ज्ञात हो गया है, तो मुझे आपके दुःख और चिन्ता का कोई कारण नहीं दिखाई देता।
Raghunandan! Now that you have got the news of Sita and the location of the enemy, I see no reason for your sadness and worry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×