श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.2.18 
वानरेषु समासक्तं न ते कार्यं विपत्स्यते।
अचिराद् द्रक्ष्यसे सीतां तीर्त्वा सागरमक्षयम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा जो कार्य वानरों को सौंपा गया है, वह नष्ट नहीं होगा। तुम शीघ्र ही इस अथाह सागर को पार करके सीता के दर्शन करोगे।॥18॥
 
‘Your task, which has been entrusted to the monkeys, will not be spoilt. You will soon cross this inexhaustible ocean and see Sita.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)