श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.2.13 
तदलं विक्लवां बुद्धिं राजन् सर्वार्थनाशिनीम्।
पुरुषस्य हि लोकेऽस्मिन् शोक: शौर्यापकर्षण:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"इसलिए हे राजन! इस चंचल मन का आश्रय मत लो। मन की इस चंचलता को त्याग दो, क्योंकि यह सब कार्यों को बिगाड़ देती है और शोक इस संसार में मनुष्य के पराक्रम का नाश कर देता है। ॥13॥
 
"Therefore, O King, do not take shelter of this restless mind. Give up this restlessness of the mind, because it spoils all the tasks and grief destroys the bravery of a man in this world. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)