श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.2.11 
अबद्‍ध्वा सागरे सेतुं घोरे च वरुणालये।
लङ्कां न मर्दितुं शक्या सेन्द्रैरपि सुरासुरै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘वरुण के निवासस्थान वाले भयंकर समुद्र पर सेतु बनाए बिना, समस्त देवताओं और दानवों सहित इन्द्र भी लंका को रौंद नहीं सकते।॥11॥
 
‘Without building a bridge over the fierce ocean where Varuna resides, even Indra, along with all the gods and demons cannot trample Lanka.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)