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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.19.9 
अवध्य: सर्वभूतानां गन्धर्वोरगपक्षिणाम्।
राजपुत्र दशग्रीवो वरदानात् स्वयम्भुव:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! ब्रह्माजी के वरदान के प्रभाव से दस मुख वाला रावण (मनुष्यों को छोड़कर), गन्धर्वों, सर्पों और पक्षियों आदि सभी प्राणियों के लिए अविनाशी है॥9॥
 
Prince! Due to the influence of Brahmaji's boon, the ten-faced Ravana is indestructible to all creatures (except humans), Gandharvas, snakes and birds etc. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)