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ramayan 6.19.41: उनके ऐसा कहने पर श्री रामजी समुद्र के किनारे कुशा बिछाकर उस पर उसी प्रकार बैठ गए जैसे अग्निदेव वेदी पर बैठते हैं॥41॥   |   ramayan सर्ग 6.19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.19.41 
एवमुक्त: कुशास्तीर्णे तीरे नदनदीपते:।
संविवेश तदा रामो वेद्यामिव हुताशन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर श्री रामजी समुद्र के किनारे कुशा बिछाकर उस पर उसी प्रकार बैठ गए जैसे अग्निदेव वेदी पर बैठते हैं॥41॥
 
Upon their saying this, Sri Rama then spread out kusha grass on the sea-shore and sat on it in the same manner as Agnidev sits on an altar. ॥ 41॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकोनविंश: सर्ग: ॥ १ ९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें उन्नीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)