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ramayan 6.19.17: विभीषण के ये वचन सुनकर रघुकुल के वंशज श्री राम ने मन में बार-बार विचार किया और इस प्रकार कहा-॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.19.17 
विभीषणस्य तु वचस्तच्छ्रुत्वा रघुसत्तम:।
अन्वीक्ष्य मनसा सर्वमिदं वचनमब्रवीत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
विभीषण के ये वचन सुनकर रघुकुल के वंशज श्री राम ने मन में बार-बार विचार किया और इस प्रकार कहा-॥17॥
 
On hearing these words of Vibhishana, Shri Ram, the descendant of the Raghukul, pondered over it again and again in his mind and said thus -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)