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ramayan 6.18.6-7: वानरराज सुग्रीव के ये वचन सुनकर धर्मात्मा श्री रघुनाथजी ने सबकी ओर देखकर मुस्कराकर धर्मशील लक्ष्मण से इस प्रकार कहा:   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.6-7 
वानराधिपतेर्वाक्यं श्रुत्वा सर्वानुदीक्ष्य तु॥ ६॥
ईषदुत्स्मयमानस्तु लक्ष्मणं पुण्यलक्षणम्।
इति होवाच काकुत्स्थो वाक्यं सत्यपराक्रम:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वानरराज सुग्रीव के ये वचन सुनकर धर्मात्मा श्री रघुनाथजी ने सबकी ओर देखकर मुस्कराकर धर्मशील लक्ष्मण से इस प्रकार कहा:
 
On hearing these words of the King of Monkeys, Sugreeva, the virtuous Sri Raghunatha looked at everyone and smiled and spoke to Lakshmana of pious character thus:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)