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ramayan 6.18.32: अतः मैं महर्षि कंडु के उस सत्य एवं उत्तम वचन का ही पालन करूँगा; क्योंकि उससे धर्म, यश और स्वर्ग की प्राप्ति होगी ॥32॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.32 
करिष्यामि यथार्थं तु कण्डोर्वचनमुत्तमम्।
धर्मिष्ठं च यशस्यं च स्वर्ग्यं स्यात् तु फलोदये॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं महर्षि कंडु के उस सत्य एवं उत्तम वचन का ही पालन करूँगा; क्योंकि उससे धर्म, यश और स्वर्ग की प्राप्ति होगी ॥32॥
 
Therefore I will follow only that true and good word of Maharishi Kandu; Because it will result in attaining religion, fame and heaven. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)